
मरवाही वनमंडल में सागौन के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंडरीपानी बीट में जहां कभी करोड़ों की लागत से तैयार प्लांटेशन लहलहाता था, वहां अब सिर्फ ठूंठ और खाली जमीन नजर आ रही है।
जंगल कटते रहे… विभाग सोता रहा?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि हजारों पेड़ों की कटाई एक-दो दिन में नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही थी। सवाल उठता है कि जब यह सब हो रहा था, तब जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?
क्या वन विभाग को इसकी भनक नहीं लगी या फिर सब कुछ जानते हुए भी अनदेखा किया गया?

तस्करों के हौसले बुलंद
जिस तरीके से सुनियोजित कटाई हुई है, वह साफ संकेत देता है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं, बल्कि संगठित तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है।
करोड़ों की सागौन लकड़ी गायब हो गई और विभाग के पास ठोस जवाब नहीं है।
कार्रवाई सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर क्यों?
पहले भी ऐसे मामलों में सिर्फ बीट गार्ड या निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई होती रही है। बड़े अधिकारी हमेशा जांच से बाहर क्यों रहते हैं?
क्या जिम्मेदारी तय करने से बचा जा रहा है?
DFO की चुप्पी पर सवाल
इतने बड़े घोटाले जैसे हालात के बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारी की ओर से कोई स्पष्ट बयान या कड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
लोग पूछ रहे हैं—
👉 क्या इस पूरे मामले में उच्च स्तर की जवाबदेही तय होगी?
👉 या फिर मामला फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
जंगल खत्म तो भविष्य खत्म
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की कटाई से
* तापमान बढ़ेगा
* जल स्रोत सूखेंगे
* वन्यजीवों का संकट बढ़ेगा
यानी यह सिर्फ पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि आने वाले भविष्य पर सीधा हमला है।
अब क्या करेगा प्रशासन?
स्थानीय लोगों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
सवाल साफ है—
👉 क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
👉 या मरवाही के जंगल यूं ही साफ होते रहेंगे?











